आज की रात
आज की रात
सोचता हूँ,
सोऊँ ही नहीं,
यूँ ही देखता रहूँ तुम्हें
और तुम सो जाओ -
सोने से पहले देखो आखिरी,
चेहरा मेरा,
और जो जागो सुबह
मुझे ही तुम
तुमको देखता देखो ।
आज की रात
सोचता हूँ,
सोऊँ ही नहीं,
देखता रहूँ तुम्हें,
यूँ ही …
आज की रात
सोचता हूँ,
सोऊँ ही नहीं,
यूँ ही देखता रहूँ तुम्हें
और तुम सो जाओ -
सोने से पहले देखो आखिरी,
चेहरा मेरा,
और जो जागो सुबह
मुझे ही तुम
तुमको देखता देखो ।
आज की रात
सोचता हूँ,
सोऊँ ही नहीं,
देखता रहूँ तुम्हें,
यूँ ही …
जब उसने एक न मानी
तो हमने कहा
कि
तुम्हें हमारी बात का भरोसा न हो,
लो खुद देख लो,
पर सच की कड़वाहट का अंदाज़ा उसे
इतना था
कि भरोसा तो बाद की बात,
उसने देखने तक से इनकार कर दिया;
और तो और,
उसने हमें ही
झूठा करार किया
और चल दिया,
पर जहाँ भी गया
बात उसके मन में खटकती रही
और जितना खटकी
उसने हमें उतना और झूठा ठहराया ।
और जीता रहा वह
उस सच की उपेक्षा में
जो कि,
उसे कहीं न कहीं पता था,
है ।
ठीक वैसे ही करता रहा
बचने की कोशिश
जैसे करता है शुतुरमुर्ग
रेत में सर घुसाकर
शिकारी से ध्यान हटाकर
कि वह न देखे अगर शिकारी को,
शिकारी भी न देखेगा उसे;
बचता नहीं मगर शुतुरमुर्ग ।
एक बार अगर लग जाए पता
कि सच है,
देख लेना ही बेहतर है,
मार ही डालता है वरना ।
उँगलियों से तुम्हारी
खेलती रहीं
उंगलियाँ मेरी,
एक दफ़ा भी न छूटे
हाथों से हाथ,
कल रात भर
आँखों से हमने तारे चुने ।
चाँद रात भर चाँदनी की मार्फ़त
धरती से करता रहा बातें,
हमने भी रात भर
उनके अफ़साने सुने ।
मैं सुलझाता रहा
तुम्हारी उलझी लटें रात भर
और उतना ही उनमें
उलझता रहा,
इसी बीच
बीन लिए तुमने
रात की गोद में बिखरे
रौशनी के तमाम धागे,
और कल रात भर हमने
ख्वाब बुने ।
.
कल रात कुछ ऐसा हुआ -
आंखों से हमने तारे चुने,
खामोश बैठे अफ़साने सुने
और रौशनी के धागों से रात भर,
रंग-बिरंगे ख्वाब बुने ।
How splendid it is
When,
Just like that,
One re-connects with old forgotten relationships,
Coming across them
In the mailbox or in the street
Or in someone’s re-tweet,
Or in the contact list of a now-not-in-use phone!
Quite like the unfathomable pleasure
One experiences upon finding
Long misplaced things,
Even though no longer of use,
An old letter in the pages of a book,
A long lost key beside the old Almirah,
In the nook,
et cetera.
.
How splendid would it be
If we
Having found some of them
Serendipitously,
Kept them
Carefully
In a warm corner of our heart
Never to be lost again.
.
Without our knowing so,
Our lives become emptier
On account of
All the people
Lost to us
Along the way.
.
HOW SPLENDID IT IS
TO FIND SOME OF THEM
ONCE AGAIN!
जहाँ ज़रुरत थी
बस कोशिशों की,
वो लोग
दिन में चाय की चुस्कियों
और शामों को
बियर की गिलासों
पर
दुनिया को बदलने का
एक ‘perfect plan’
discuss करने में लगे थे
और वहाँ
उनकी दुनिया से दूर कहीं
एक दूसरी दुनिया
जिससे वो वाक़िफ़ भी न थे,
धीरे-धीरे
बिखरती जा रही थी।
There is something about it
I cannot name.
I cannot define it in/with words.
brown does not do justice to it
just as white does not to light,
or black to night.
fair, like dark,
too general to pique
any interest
in something so unique.
If only
your skin were to be perforated into parts
you would be a rainbow
but just as only human eyes have
the capacity to see one,
do not be surprised
if no one else
but I
can see the rainbow
beneath your beautiful skin!
वक्त
बीता जाता है,
और हम भी,
धीरे-धीरे,
बीते जाते हैं ।
बस यूँ ही,
बे-मतलब,
जीते जाते हैं ।।
एक कैमरे ने मुझे क़ैद करने की कोशिश की तो मैं मुसकुरा भर दिया,
उसे क्या पता के मुझे तो न जाने कब से, उनकी नज़रों ने क़ैद कर रखा है...
| सो | मँ | बु | गु | शु | श | र |
|---|---|---|---|---|---|---|
| « अप्रै | ||||||
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | ||
| 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 |
| 13 | 14 | 15 | 16 | 17 | 18 | 19 |
| 20 | 21 | 22 | 23 | 24 | 25 | 26 |
| 27 | 28 | 29 | 30 | 31 | ||