कुछ नया : एक ग़ज़ल
शिकायत है जिन्हें कि करने को कुछ भी नया नहीं,
चलो आज कुछ उनकी सुनें जिनका दर्द बयाँ नहीं !!
.
लेना हो तो उनका ग़म बाँटो, देना है उनको ख़ुशी दो,
प्रेम है हृदय में तो आओ, उन्हें चाहिए दया नहीं !!
.
छुपकर जो देखते हैं यहाँ, पशुता का नग्न नृत्य,
आँखों में क्या उनकी बची, तनिक भी हया नहीं !!
.
ये न कह देना, कि एक तुम्हारे करने से होगा क्या,
जो इरादा हो मज़बूत तो बदल सकता क्या नहीं !!
.
हर चीज़ बदलती है, उट्ठो तुम भी – बदल दो सब,
देखते क्या सोचते हो क्या, वक़्त अब भी गया नहीं !!
No trackbacks yet.