कौन-सा चेहरा?
बेहद थक गया हूँ
अलग-अलग चेहरे
पहनते-पहनते,
बदलते-बदलते;
अपने ही चेहरों की भीड़ में
खो गया हूँ
इस कदर
कि उलटा-पुलटा हो गया है सब,
कौन-सा मुँह लिए
जाना कहाँ है ?
.
ख़ुशी के मौके पर
मातमी चेहरा लिए
पहुँच जाता हूँ लोगों के उत्सवों में
और खराब कर देता हूँ सबका मूड
तो कभी हँसता चेहरा लिए पहुँच जाता हूँ
किसी के प्रियजन की अंत्येष्टि-क्रिया में
और गर्दन हाथ दे कर
फेंका जाता हूँ बाहर !
कभी परिजनों के बीच पहुँच जाता हूँ
बनावटी मुसकान वाला चेहरा लिए
तो कभी दुश्मनों से मिल आता हूँ
सच का चेहरा पहन !
.
बहुत थक गया हूँ चेहरे
बदलते-बदलते
इतना कि चेहरा अब
कोई भी पहना जाता नहीं,
और असली चेहरा बदरंग हो गया है इतना
कि पहचानने से इनकार कर देते हैं लोग
और मैं खुद भी निकल जाऊं
लोगों की भीड़ में -
जैसा हूँ वैसा -
ऐसी हिम्मत जुटा पाता नहीं !
पहनते-पहनते,
बदलते-बदलते;
अपने ही चेहरों की भीड़ में
खो गया हूँ
इस कदर
कि उलटा-पुलटा हो गया है सब,
कौन-सा मुँह लिए
जाना कहाँ है ?
.
ख़ुशी के मौके पर
मातमी चेहरा लिए
पहुँच जाता हूँ लोगों के उत्सवों में
और खराब कर देता हूँ सबका मूड
तो कभी हँसता चेहरा लिए पहुँच जाता हूँ
किसी के प्रियजन की अंत्येष्टि-क्रिया में
और गर्दन हाथ दे कर
फेंका जाता हूँ बाहर !
कभी परिजनों के बीच पहुँच जाता हूँ
बनावटी मुसकान वाला चेहरा लिए
तो कभी दुश्मनों से मिल आता हूँ
सच का चेहरा पहन !
.
बहुत थक गया हूँ चेहरे
बदलते-बदलते
इतना कि चेहरा अब
कोई भी पहना जाता नहीं,
और असली चेहरा बदरंग हो गया है इतना
कि पहचानने से इनकार कर देते हैं लोग
और मैं खुद भी निकल जाऊं
लोगों की भीड़ में -
जैसा हूँ वैसा -
ऐसी हिम्मत जुटा पाता नहीं !
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