उसकी बड़ी-बड़ी बोलती आँखों के बड़े-बड़े बोलते आँसू
उसकी
बड़ी-बड़ी बोलती आँखों के
ये बड़े-बड़े बोलते
आँसू |
.
मैंने सोचा
कुछ हुआ हो कहीं !
उससे पूछा – “दुखी हो?”
काँपती गीली आवाज़ में बोली -
“नहीं, बिलकुल भी नहीं |”
.
मुझे विश्वास नहीं हुआ -
करीब से उसके चेहरे को
जांच-परख कर देखा,
उसकी भीगी पलकों पर
अपने होठों को रख कर देखा |
फिर भी जो भरोसा न हुआ,
मैंने उन आंसुओं को चख कर देखा |
.
वह मुसकुरायी तब जाकर कहीं;
और मैंने उसके हाथ
अपने हाथों में लेकर कहा -
देखो, अब कभी रोना नहीं |
.
मगर सच कहूँ तो
उसकी मासूम आँखों से
यूँ आँसुओं का बरबस टपकना
मुझे बहुत अच्छा लगता है |
झूठे लोगों की इस बनावटी दुनिया में
कुछ तो है
जो सहज और सच्चा लगता है ||
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Is banavti duniya mein jab is kavi ki kavita padho toh bahut acha lagta hai
And your blog was in tears of abandonment.. he he
FR…
wobderful…aapki kavitaon ke tarif me shabd nahi…