Archive for February, 2012
आज फिर एक बार मन ने एक उड़ान भरी आज फिर एक बार बड़े ज़ोर से मैं नीचे गिरा | . ऊपर से - सब कुछ बहुत छोटा मगर कितना खूबसूरत; मैं सबसे बड़ा मगर इस विस्तीर्ण अंतराल में कितना छोटा, कितना निरर्थक, और फिर अचानक अविरल गिरने का डर - उफ्फ़, बहुत भयानक ! [ READ MORE ]
एक कैमरे ने मुझे क़ैद करने की कोशिश की तो मैं मुसकुरा भर दिया, उसे क्या पता के मुझे तो न जाने कब से, उनकी नज़रों ने क़ैद कर रखा है...
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