हमें मालूम कहाँ


इस ज़माने के तौर-तरीके सीख पाए नहीं हम,
जीने का कोई एक तरीका, हमें मालूम कहाँ !
.
आइना कहता कभी, कि थके-बुझे-से हैं हम
रंग पड़ता अगर हो फ़ीका, हमें मालूम कहाँ !
.
समझे कोई, तो समझा दे हमें भी ये फलसफा,
मतलब इस ज़िन्दगी का, हमें मालूम कहाँ !
.
पूछते हो कि जा रहे हैं किधर, मंजिल है कौन-सी,
अंत क्या है इस लगी का, हमें मालूम कहाँ !
.
राह पर ही गुज़ार दी तमाम ज़िन्दगी हमने
टिककर रहने का ‘अभि’ सलीका, हमें मालूम कहाँ !
    • Kirti
    • मार्च 13th, 2010

    Awesome !!.. loved the last two lines a lot!..🙂🙂

  1. Bahut Khoob.

    Dillagi se dil na laga tik kar hi rah jayega
    Rahguzar itani to bezar nahin ye Abhi tumhe maloom kahan.

    • Amrita
    • मार्च 13th, 2010

    Loved this one🙂

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