एक आंसू


बहुत की कोशिश

कि भनक न लगे किसी को तनिक भी,

बहुत चाहा

कि छुपा रखूँ दिल के अन्दर ही,

मुसकान की मिट्टी की एक मोटी परत के नीचे

दफना दिया दर्द की चिंगारी को !

किसी को कानो-कान खबर भी होने न दी

कि जज़्बात का समंदर

सीने में मचल रहा था,

और मैं कतरा-कतरा पिघल रहा था !

बहुत लड़ा,

एक मज़बूत बाँध भी

किया खड़ा;

एक ग़द्दार आंसू मगर,

छुपा बैठा था जो पलकों में कहीं,

किनारों को तोड़कर

कमबख्त, ढुलक ही पड़ा !

    • hullas
    • जुलाई 28th, 2010

    AWESOME sir …especialy the last lines …felt connctd to it…just awesome!

    • kirti
    • जुलाई 28th, 2010

    Beautiful, very beautiful🙂

  1. अच्छे भाव हैं
    अच्छा है सहजता से अंदर-बाहर का एकाकार हो जाना

    • Neelabh
    • जुलाई 29th, 2010

    Liked this one.

    • shipra jain
    • जुलाई 30th, 2010

    ye ehsaas hr kisi ke dard ko chu gya hoga so nice

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