दुःख


कुछ तो है

जो दिखता नहीं

पर अन्दर ही अन्दर

रिसता रहता है !

खोखला किये जाता है,

दिल के पत्थर पर

न जाने क्या घिसता रहता है !

कुछ तो है,

जो उंगली रख कर

बता नहीं सकता कहाँ है –

‘यहाँ ?’, ‘नहीं!’

‘यहाँ ??’, ‘यहाँ भी नहीं !’

‘यहाँ ???’

नहीं !

वहाँ भी नहीं है !

पर कुछ तो है

सीने में नासूर-सा

पक रहा है,

कुछ तो कहीं है !

क्या है किसी से अगर कह पाता

तो अच्छा होता,

या आँखों से ही कमबख्त बह जाता

तो अच्छा होता !

  1. very nice …………..

  1. No trackbacks yet.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: