अकेलापन (3)


बेबस शाम को चुपचाप

खाली हाथ लौटते हुए

हर रोज़  ताकता है रास्ता,

डूबते सूरज को तिनके का सहारा देकर बचाने

कोई उस ओर जाता ही नहीं !

.

सब खा लेते हैं

अपने-अपने कोने में अपनी-अपनी रोटी

और जो भूखा जागता है आँगन में

सारी रात बूढा बरगद,

उसे कोई दो कौर खिलाता ही नहीं !

.

देखा नहीं जाता किसी से रात का अकेलापन

सो जाते हैं सब,

उसके बिखरे बालों में उंगलियाँ उलझाकर

हलके से उसके गाल थपथपाकर,

प्यार से उसे कभी कोई सुलाता ही नहीं !

    • nupur
    • नवम्बर 25th, 2010

    i feel😥

    Sulaata hi nahin…

    F..R..

  1. really goo!

    raat ki tanhaai mahesoos hui!

      • abhishektheoutsider
      • नवम्बर 29th, 2010

      Thank you🙂

  2. Great …………….

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