बलात्कार का गीत (दिल्ली काण्ड के विरुद्ध)


(male chorus )

अगर किसी गैर मर्द

के साथ हो तुम घूमती,

अविवाहित हो मगर

होठ उसके चूमती ।

बनता है तुम पर

हमारा भी तो फिर अधिकार ।

यह कहाँ बलात्कार, सजनि !

यह कहाँ बलात्कार ।।

..

अगर पहने हुए तुमने

कपड़े छोटे-छोटे,

और तुम्हें देख मन में

जागे ख्वाब खोटे ।

बनता है तुम पर

हमारा भी तो फिर अधिकार ।

यह कहाँ बलात्कार, सजनि !

यह कहाँ बलात्कार ।।

..

वासना से ग्रसित हम

पाशविकता से लाचार,

हम तो जैसे कुत्ते समझो

हम मानो बीमार ।

बनता है तुम पर

हमारा भी तो फिर अधिकार ।

यह कहाँ बलात्कार, सजनि !

यह कहाँ बलात्कार ।।

..

(female chorus)

हम भी गर ऐसा ही कुछ

करें तुम्हारे साथ,

काट कर यह लिंग तुम्हारा

दें तुम्हारे हाथ ।

फिर शायद समझ आए तुम्हें

क्या किसका अधिकार ।

क्या वह होगा बलात्कार, कुत्तों !

क्या वह होगा बलात्कार ??

..

मस्तिष्क के भी बदले चलता

तुम्हारा एक ही जो अंग

आँखों में तेज़ाब डाल कर दें

तुम्हारी दुष्ट दृष्टि भंग

फिर शायद समझ आए तुम्हें

क्या किसका अधिकार ।

क्या वह होगा बलात्कार, कुत्तों !

क्या वह होगा बलात्कार ??

..

    • preeti
    • दिसम्बर 18th, 2012

    Just amazed at how beautifully u have written what goes on a woman’s mind at such times!

    • AMIT
    • दिसम्बर 19th, 2012

    This is just wording the frustration we all went through after reading this news! Brilliant This is!

  1. 😦

  1. No trackbacks yet.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: