खोना


तुम न जाने कहाँ-कहाँ
खोयी-खोयी रहती हो आजकल
और मैं तुम में खोया
और भी खोता जाता हूँ
जहाँ-जहाँ खोयी खोयी रहती हो तुम ।
खोज पाओगी मुझे क्या
जब मैं जहाँ-तहाँ
तितर-बितर होकर
बिखर जाऊँगा,
और ढूंढ-ढूंढ कर भी खुद ही को जो
कहीं खोज नहीं पाउँगा ?

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